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शनिवार, 22 जनवरी 2011

तेरा इंतज़ार हूँ ,,,,,,,,,,,,,,,,,,




तूने नहीं जाना,न पहचाना मुझे अभी !
दामन में तेरे रहती हूँ, मैं वो बहार हूँ !!

आये न शर्म खुद पे,तुझे मेरे हमनशीं !
तेरे लिए मैं,खुद से ही खुद शर्मशार हूँ  !!

फिर भी रही कमी,न रहा मुझसे रू-ब-रू !
कहने को किसी को,तू कहे-"तेरा प्यार हूँ !!"

जो तेरा था तुझी ने,खुद उसको भुला दिया !
कोई न मिलेगा,जो कहे-"तेरा प्यार हूँ !!"

जाने क्या खोज है तुझे,कि फिरे तू दर-ब दर !
"बन्दे की दुआ",कोई कहे-"तेरा इंतज़ार  हूँ !!"

6 टिप्‍पणियां:

  1. संगीता जी...

    शुक्रिया....!!!!!!!!!!

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  2. "बस यूँ... ही..." पर पहली बार आना हुआ - भावों की गागर है आपकी यह रचना - शीर्षक होता तो सोने पर सुहागा होता.

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  3. बहुत प्रेरणा देती हुई सुन्दर रचना ...
    गणतंत्र दिवस की हार्दिक बधाइयाँ !!

    Happy Republic Day.........Jai HIND

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