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मंगलवार, 4 जनवरी 2011

कुछ शेर सुनाती हूँ मैं.......

मेरी मोहब्बत को समझ कर के मेरी मजबूरी,
वो आजमाता रहा मुझको मेरे खुदा की तरह!

ज़माने भर कि नमी भर के  मेरी आँखों में,
उदासियाँ तमाम दे गया सौगात की तरह!

ख्वाब देखे थे जिसके साथ मैंने शाम-ओ-सहर, 
दामन  में फूल बो गया काँटों की तरह!

2 टिप्‍पणियां:

  1. बेहद कड़वा अनुभव पूनम जी
    खुबसूरत अभिव्यक्ति

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  2. बड़ी ही सुंदरता से उभारा है मनोभावों को.....सुन्दर रचना के लिए आपका आभार.

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