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गुरुवार, 3 फ़रवरी 2011

आप भी कुछ कीजिये----




इंसान की फितरत है की वह खाली नहीं बैठ पाता है.कुछ न कुछ करता रहता है.जीवन शून्य नजर आने लगता है न कुछ करने से,इसलिए वह उस शून्य को भरने की कोशिश करता रहता है--पेट को भोजन से,समय को काम से,बुद्धि को ज्ञान से,वासनाओं को इन्द्रिय सुख से,मन को अनुभूति और संवेदनाओं से, और भी न जाने कितने तरह का भराव चलता  रहता है...कभी जाने,कभी अनजाने..!!  इनमें से एक स्थान पर भी कमीं रह गई तो वह अपने जीवन को सार्थक नहीं मानता. उसे लगता है की कहीं कुछ खालीपन,कहीं कुछ अपूर्ण रह गया और फिर वही चक्र भरने का................!!!
हम अक्सर बात करते हैं पूर्णता-अपूर्णता की.जिसके भी जीवन में कहीं दौड़ है,वह अपनी अपूर्णता को पूर्ण करने के लिए हैं.चाहे वह धन हो,ज्ञान हो,सुख हो,शान्ति हो, भावनाएं,संवेदनाएं....सभी कहीं न कहीं जीवन की किसी अपूर्ण अवस्था को पूर्ण करने के लिए अर्जित की जाती हैं !!
इसके लिए हमारे आस-पास ढेरों साधन भी मिल जाते हैं.समाज,समय,परिस्थिति,दोस्त,रिश्ते,इंसान और खुद भगवान् (प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष) रूप में सहायक होते रहते हैं इसमें.जीवन इसी प्रकार चलता रहता है...परिस्थितियाँ किसी भी तरह से उत्पन्न हों..किसी के साथ..किसी के द्वारा..जीवन की इस अपूर्णता को पूर्ण करने के लिए इंसान भागता रहता है--कभी किसी के साथ...कभी किसी के पास......!!!!!!  

10 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत सही लिखा आपने .
    इंसान अपूर्ण ही है.
    अपूर्ण ही रहता है.
    जिस दिन पूर्ण हो जाएगा,भगवान् बन जाएगा.
    शुभ प्रभात.

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  2. सुन्दर सार्थक विचार। धन्यवाद।

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  3. बस यह इंसान कि फितरत है .....आपके विचार बहुत सार्थक है ..पूनम जी आपका आभार ..

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  4. और वो अपूर्णता क्या कभी पूर्ण होती है .... शायद नहीं?

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  5. आदरणीया पूनम जी ! यदि आप 'प्यारी मां' ब्लॉग के लेखिका मंडल की सम्मानित सदस्य बनना चाहती हैं तो
    कृपया अपनी ईमेल आई डी भेज दीजिये और फिर आपको निमंत्रण भेजा जाएगा । जिसे स्वीकार करने के बाद आप इस ब्लाग के लिए लिखना शुरू
    कर सकती हैं.
    यह एक अभियान है मां के गौरव की रक्षा का .
    मां बचाओ , मानवता बचाओ .

    http://pyarimaan.blogspot.com/2011/02/blog-post_03.html

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  6. शानदार पेशकश।

    डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'
    सम्पादक-प्रेसपालिका (जयपुर से प्रकाशित हिंदी पाक्षिक)एवं
    राष्ट्रीय अध्यक्ष-भ्रष्टाचार एवं अत्याचार अन्वेषण संस्थान (बास)
    0141-2222225 (सायं 7 सम 8 बजे)
    098285-02666

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  7. बेहतरीन लेखन......बधाई।
    वसंत पंचमी की ढेरो शुभकामनाए

    कुछ दिनों से बाहर होने के कारण ब्लॉग पर नहीं आ सका
    माफ़ी चाहता हूँ

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