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शनिवार, 12 फ़रवरी 2011

स्पर्श --




जब भी कभी-
सोचा है तुम्हारे बारे में,
मैंने अपनी तन्हाई में
तो यूँ लगा कि...
जैसे तुम पास हो मेरे
बहुत ही  पास !!
इतने कि -
मैं तुम्हें.....
हाथ बढ़ा कर 
छू सकती  हूँ.
मैंने तुम्हारा स्पर्श  
महसूस भी किया है
ऐसे पलों में,
जबकि मैंने तुम्हें
अपने पास पाया है
ऐसा हर एक लम्हा
जो तुम्हारे साथ गुज़रा है मेरा
संजो कर रखा है मैंने !!
क्योंकि,
इन लम्हों में तुम मेरे पास होते हो,
मेरे  बहुत-बहुत पास  !!!



12 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी रचनात्मक ,खूबसूरत और भावमयी
    प्रस्तुति भी कल के चर्चा मंच का आकर्षण बनी है
    कल (14-2-2011) के चर्चा मंच पर अपनी पोस्ट
    देखियेगा और अपने विचारों से चर्चामंच पर आकर
    अवगत कराइयेगा और हमारा हौसला बढाइयेगा।
    http://charchamanch.uchcharan.com

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  2. बहुत ही खूबसूरत अहसास.
    आपकी कलम को सलाम

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  3. बहुत सुन्दर अह्सासपूर्ण अभिव्यक्ति..

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  4. अह्सासपूर्ण यथार्थमय सुन्दर पोस्ट
    कविता के साथ चित्र भी बहुत सुन्दर लगाया है.

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  5. अह्सासपूर्ण यथार्थमय सुन्दर पोस्ट
    कविता के साथ चित्र भी बहुत सुन्दर लगाया है.

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