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रविवार, 10 फ़रवरी 2013

बसंत.......





                                    दूर गगन तक फैल गयी है तरुनाई...
                             झूम झूम के घूंघट खोले पुरवाई ,
                             फूल फूल पे भौंरें डोलें...मुख चूमें...
                             कली कली अनजानी खुद ही शरमाई ,
                             पीली सरसों ने सुगंध बिखरा दी अपनी...
                             गाने लगी हवा.....लो फिर बसंत आई...!!






11 टिप्‍पणियां:

  1. वाह ..वाह ...बहुत खूबसूरत ख्याल ...सुन्दर शब्द संयोजन।

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  2. लो फिर ऋतु बसंत आई...सुंदर भाव और शब्द..

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  3. बसंत का हार्दिक स्वागत है ...

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  4. आदरणीया पूनम जी
    नमस्कार !

    आपकी यह छोटी-सी बसंत रचना पढ़ कर आनंद आ गया ...
    दूर गगन तक फैल गई है तरुणाई
    झूम-झूम के घूंघट खोले पुरवाई ...


    मन बार बार कह रहा है वाह ! वाऽह ! वाऽऽह !
    बहुत ख़ूबसूरत !
    वाऽह ! क्या बात है !
    :)

    बसंत पंचमी एवं
    आने वाले सभी उत्सवों-मंगलदिवसों के लिए
    हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं-मंगलकामनाएं !
    राजेन्द्र स्वर्णकार

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  5. आप सभी सुधिजनों का धन्यवाद.....!

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