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मंगलवार, 21 अगस्त 2012

मोम ......









                                  मोम को न जाने क्यूँ 
                            पत्थर बनाने में लगे रहते हैं लोग 
                               और फिर उम्मीद करते हैं 
                                  कि वो वापस मोम हो जाये....








10 टिप्‍पणियां:

  1. पूनम जी, मोम के बहाने आपने बहुत बडी बात कह दी।

    एकदम गागर में सागर समा गया हो जैसे।

    ............
    डायन का तिलिस्‍म!
    हर अदा पर निसार हो जाएँ...

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  2. सचमुच ! जैसे हम स्वयं ही अपनों को दूर करते हैं फिर उन्हें करीब पाना चाहते हैं..

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  3. आपकी पोस्ट आज 23/8/2012 के चर्चा मंच पर प्रस्तुत की गई है
    कृपया पधारें

    चर्चा - 980 :चर्चाकार-दिलबाग विर्क

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  4. बहुत गहन भाव छिपा है इन पंक्तियों में व्यक्तित्व में परिवर्तन बार बार नहीं होता एक बार कठोर हो गया तो फिर से उसका पिघलना नामुमकिन है

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