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सोमवार, 30 मई 2011

तुम्हारे लिए........



तुम्हारे दरवाजे पे
जो सूखे फूल हैं
मेरी यादों के...
चुन लेना उन्हें
और दबा देना
किसी किताब में !
एकांत में...
जब पन्ने पलटोगे
तो खुशबू बिखर जायेगी
हर सू..........!! 


(भाई किशोर जी को समर्पित )



13 टिप्‍पणियां:

  1. कोमल संवेदना को प्रस्तुत करती सुन्दर अभिव्यक्ति.कवि हृदय को समझना कोई आसान काम नहीं.आभार.

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  2. स्मृतियों की महक सदा ही बनी रहती है, नवीन।

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  3. कितनी सरलता से ह्रदय कि छूते हुए निकल गए आप ....
    वाह !

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  4. sukomal bhavon ke pushp gucchh ki khusbu mein puri tarah bheeng gaya...

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  5. भाई मुझे माना है तो बहन जो कहो , इसका फ़र्ज़ निभाऊंगा ...

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  6. नहीं चाहिए सूखे फूल मुझे
    तेरे आंसू से भीगे शब्दों को समेटने के लिए मैं हूँ
    बस यूँ ही मैं भी कहूँगा -
    'मैं देखूं तो सही दुनिया तुम्हें कैसे सताती है ...
    मुझसे कहो तो सही '

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  7. todaythots@gmail.com
    बहन आप जब चाहें मुझसे सम्‍पर्क कर सकती हैं ... मेरी कही बात को अन्‍यथा मत लेना, कभी भी दुखी मत होना ...।

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  8. किशोर भाई ....

    भाई की बातों को बहन द्वारा एकदम अन्यथा नहीं लिया जाता...!
    आपके concern के लिए आपकी ह्रदय से आभारी हूँ..!
    आप इन सूखे फूलों की तरफ देखें भी मत...!
    आपके लिए कुछ ताज़े फूलों को चुनने की कोशिश करती हूँ...!!
    आपकी good wishes इसी तरह बनी रहे....!!
    मैं एकदम दुखी नहीं हूँ बल्कि खुशी ही दूनी हो गई है....
    एक भाई जो मिल गया है...
    आपका आभार... !
    सच में दिल से !!

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  9. राकेशजी...

    प्रवीणजी...

    आनंदजी..

    विजयजी....

    बबनजी...

    आप सभी का आभार..

    यहाँ तक आने के लिए...!!

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  10. बहुत खूब ... सूखे हुए फूलों में भी खुश्बू होती है ... प्यार की खुश्बू ....

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  11. प्रशंसनीय,अच्छा लिखा है...

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