
करके बदनाम मुझे वो हुए हैं यूँ बेज़ार !
जो है जालिम वो मुझे किस तरह वफ़ा देगा !!
नासमझ मैं,यूँ करती रही एतबार-ओ-यकीन !
न समझ पाई मुझे वो भी यूँ दगा देगा !!
उसकी बातों ने किया है मुझे यूँ कत्ले आम !
मेरा कातिल क्या मेरे हक में फैसला देगा !!
उठा के हाथ कभी मागूँ भी तो क्या मागूँ !
मेरा पर्वर्दगार मुझको हौसला देगा !!
या खुदा ! बक्श दे मुझको मेरे इन रफ़ीकों से !
कभी तो तू भी मेरे हक में फैसला देगा !!
०५-०१-२०१२




