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गुरुवार, 29 मार्च 2012

तुझे उम्मीदे वफ़ा हो.....







यूँ खेलते हैं  मेरे दिल  से जो, वो क्या जाने...
गर मेरा दिल बुझा तो फिर न जला पाऊँगी ! 

                 तेरा एहसास, तेरा प्यार इसमें शामिल था...
                 तू  भूल जाये भी तो  मैं  न  भुला पाऊँगी !

मेरी  वफ़ा  को  मिली  तेरी  बेवफाई  यूँ...
खुदा मुआफ भी कर दे  मैं न कर पाऊँगी !

                 तुझे न होगा इल्म अब तलक किया क्या है...
                 गुनाह तेरे  मैं  दुनिया  से  यूँ  छुपाऊँगी !

मेरी हसरत है के देखूं कभी मैं दिन वो भी...
तुझे उम्मीदे वफ़ा हो...मैं मुकर जाऊँगी !

                  खुदा करे कि तू चाहे......ओ टूट कर चाहे...
                  नज़र मिली भी कभी तो मैं पलट जाऊँगी ! 

२६-०३-२०१२ 

39 टिप्‍पणियां:

  1. "very nice thoughts."

    By sagar anand on तुझे उम्मीदे वफ़ा हो..... at 6:25 AM

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  2. "वाह ... प्यार सा रिवेंज .... तुम्हें उमीदे वफा हो और मैं मुकर जाऊं ... बहुत खूब ..."

    By "दिगम्बर नासवा" on "तुझे उम्मीदे वफ़ा हो"..... on 3/28/12

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  3. "सुभानाल्लाह....बेहतरीन और मुकम्मल ग़ज़ल......दाद कबूल करें।"

    By 'इमरान अंसारी' on 'तुझे उम्मीदे वफ़ा हो'..... on 3/27/12

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  4. "तुझे न होगा इल्म .....यु छुपाऊँगी . आपके ब्लॉग पढ़ना बहुत अच्छा लगा .अच्छी रचना है"

    By 'भावना' on 'तुझे उम्मीदे वफ़ा हो'..... on 3/26/12

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  5. "बहुत खूब, सशक्त भाव।"

    By 'प्रवीण पाण्डेय' on 'तुझे उम्मीदे वफ़ा हो'..... on 3/25/12

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  6. nateejaa kuchh bhee ho
    jab dil de hee diyaa
    har haalaat se gujar jaayenge
    hasratei pooree ho naa ho
    dil se koshish karne kaa sukoon leka jaayenge

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  7. खुदा करे कि तू चाहे......ओ टूट कर चाहे...
    नज़र मिली भी कभी तो मैं पलट जाऊँगी !

    बहुत खूब ..... खूबसूरत गजल

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  8. nazar mile or mae palt jaungi.....par sach kahu sakhi easa nahi kar paougi.....bahut khub.....

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  9. आज आपके ब्लॉग पर बहुत दिनों बाद आना हुआ अल्प कालीन व्यस्तता के चलते मैं चाह कर भी आपकी रचनाएँ नहीं पढ़ पाया....बहुत बेहतरीन प्रस्‍तुति...!

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  10. कल 31/03/2012 को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

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  11. अपेक्षाओं से भरा प्रेम या प्रेम से भरी अपेक्षा।

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  12. बहुत बहुत खुबसूरत है ग़ज़ल....दाद कबूल करें इसके लिए।

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  13. वाह! कमाल की अभिव्यक्ति!

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  14. बहुत बढ़िया प्रस्तुति!
    घूम-घूमकर देखिए, अपना चर्चा मंच
    लिंक आपका है यहीं, कोई नहीं प्रपंच।।
    आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल शनिवार के चर्चा मंच पर भी होगी!
    सूचनार्थ!

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  15. खुदा करे कि तू चाहे......ओ टूट कर चाहे...
    खूबसूरत !!

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  16. बढ़िया पंक्तियां... वाह!
    सादर बधाई।

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  17. तुझे न होगा इल्म अब तलक किया क्या है...
    गुनाह तेरे मैं दुनिया से यूँ छुपाऊँगी !

    वाह वचन बधध्ता हो तो ऐसी !

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  18. खुदा करे कि तू चाहे......ओ टूट कर चाहे...
    नज़र मिली भी कभी तो मैं पलट जाऊँगी ! waah pyar ka dusra pahlu....

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  19. वाह! क्या लाज़वाब अंदाज़ है प्यार का..बेहतरीन गज़ल..

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  20. वाह!!!!!!!!

    बहुत खूबसूरत गज़ल....
    प्यार भी तकरार भी?????

    सस्नेह.

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  21. खूबसूरत रचना। भावों को अभिव्यक्त करने मे कहीं कसर नही।

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  22. गुनाह छुपाना भी और नज़र मिलने पर पलट जाना भी ...प्यार तो यही है ...सुन्दर अभिव्यक्ति के लिए बधाई

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  23. पूनम जी नमस्ते !
    "खुदा करे की तू चाहे औ टूट कर चाहे ..
    नज़र मिली भी तो कभी मैं पलट जाउंगी ..."
    .......वाह ... खुदा करे वो 'दिन' भी जल्द आये की वो क्वाहिश्मंद हो और हम सितम ढाये ...

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  24. ek taraf gunah chupaane kee baat ....phir palat jaane kee baat ......gunah chupaaye hain to saaf jahir hai chahat hai..aaur chahat hai to palata nahi jaa sakta...bahut acchi rachna hai...sadar badhayee aaur amantran ke sath

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  25. आज 01/04/2012 को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर (सुनीता शानू जी की प्रस्तुति में) लिंक की गयी हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

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  26. मेरी निःशब्द भावनाए....सादर अर्पित

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  27. संजीदा भावनाएं ... उम्दा रचना है ...

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