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मंगलवार, 3 अप्रैल 2012

रात यूँ महकी.......








                             चाँद यूँ चमका सितारों ने रौशनी खो दी,
                             रात यूँ  महकी  हवा  चुपचाप सो गयी !

                             दूर था फिर कैसे पास वो आ गया मेरे,
                             कुछ अलग सी थी मगर ये बात हो गयी !

                             चलते चलते राह में कुछ छोड़ आये थे,
                             फिर उसी बाबत ये मुलाकात हो गयी !

                             हम समझते थे कि तू आयेगा इस तरफ,
                             जाने कैसे उस तरफ मेरी राह मुड़ गयी !    

                             दिल जला कुछ इस तरह रौशन हुई शम्मा,
                             हाँ...! उसी दिल से ये रौशन रात  हो गयी !

14 टिप्‍पणियां:

  1. वाह..............

    चलते चलते राह में कुछ छोड़ आये थे..
    फिर उसी बाबत ये मुलाक़ात हो गयी...

    बहुत सुन्दर पूनम जी......

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  2. दिल में रोशनी होने से सारे जहाँ चमकने लगता है।

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  3. बहुत सुन्दर भावमयी रचना....

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  4. आपकी पोस्ट कल 5/4/2012 के चर्चा मंच पर प्रस्तुत की गई है
    कृपया पधारें
    http://charchamanch.blogspot.com
    चर्चा - 840:चर्चाकार-दिलबाग विर्क

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  5. बहुत खूबसूरत रचना
    बिम्ब खूबसूरत

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  6. बहुत ही सुन्दर
    गहन भाव की अभिव्यक्ति...
    सुन्दर प्रस्तुति....

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  7. .....खूबसूरत रचना


    संजय भास्कर
    आदत....मुस्कुराने की
    http://sanjaybhaskar.blogspot.com

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  8. sundar rachana..achaal lagaa padhkar..dher saari daad kabool karen..

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  9. बहुत खूबसूरत लगी पोस्ट....शानदार।

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