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शुक्रवार, 27 सितंबर 2013

राबता......




बेवजह उनसे बात कर डाली...
अपनी तबियत खराब कर डाली...

प्यार जब हो सका नहीं मुझसे...
मेरी बदनामियां ही कर डाली

हमने देखा नहीं उन्हें कब से...
जिंदगी यूँ तबाह कर डाली..

उनको था नाज़ अपनी सूरत पे
फिर भी सूरत खराब कर डाली..

हम भी कमतर नहीं थे कुछ उनसे...
जिंदगी उनके नाम कर डाली...

आप क्यूँ बेवजह दुखी हैं अब...
आप पर हमने है नज़र डाली

आपसे राबता रहा 'पूनम'..
इसलिए आज बात कर डाली...!

12 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत सुन्दर प्रस्तुति.. आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी पोस्ट हिंदी ब्लॉग समूह में सामिल की गयी और आप की इस प्रविष्टि की चर्चा कल - रविवार - 29/09/2013 को
    क्या बदला?
    - हिंदी ब्लॉग समूह चर्चा-अंकः25
    पर लिंक की गयी है , ताकि अधिक से अधिक लोग आपकी रचना पढ़ सकें . कृपया पधारें, सादर .... Darshan jangra


    उत्तर देंहटाएं
  2. आपने लिखा....हमने पढ़ा....
    और लोग भी पढ़ें; ...इसलिए आपकी पोस्ट हिंदी ब्लॉगर्स चौपाल में शामिल की गयी और आप की इस प्रविष्टि की चर्चा {रविवार} 29/09/2013 को पीछे कुछ भी नहीं -- हिन्दी ब्लागर्स चौपाल चर्चा : अंक-012 पर लिंक की गयी है। कृपया आप भी पधारें, आपके विचार मेरे लिए "अमोल" होंगें। सादर ....ललित चाहार

    उत्तर देंहटाएं
  3. बेवजह उनसे बात कर डाली ,

    मौत अपनी करीब कर डाली।

    बेवजह मिल गए थे रस्ते में ,

    खामखा उनसे बात कर डाली।

    भोली भाली थी कमसिन सूरत तो ,

    उनसे मिलके खराब कर डाली।

    ज़िन्दगी कट रही थी मस्ती में ,

    अपनी हालात खराब कर डाली।

    बहुत बढ़िया रचना है आपकी अलग एहसासात की।

    उत्तर देंहटाएं
    उत्तर
    1. वाह....बहुत खूब....वीरेंद्र जी....
      अति सुन्दर...

      हटाएं
  4. आपके ब्लॉग को ब्लॉग"दीप" में शामिल किया गया है | जरूर पधारें और फॉलो कर उत्साह बढ़ाएँ |
    ब्लॉग"दीप"

    उत्तर देंहटाएं
  5. वाह वाह
    "प्यार जब हो सका नहीं मुझसे...
    मेरी बदनामियां ही कर डाली"

    उत्तर देंहटाएं