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सोमवार, 2 सितंबर 2013

अधूरे ख्वाब...





बेचैन बहुत कर देते हैं 
कुछ ख्वाब अधूरे इस दिल को..
चुपके से दिल में रहते हैं ! 
जो ख्वाब न पूरे हो पाए 
अक्सर आँखों में चुभते हैं !
पलकों पर ओस की बूंदों से 
लहराते हैं कुछ झिलमिल से 
कुछ ख्वाब अधूरे-आधे से 
जो आज छलक फिर आये हैं 
इन आँखों में आँसू बन कर...
इन पलकों पर मोती बन कर....!!



***पूनम***


5 टिप्‍पणियां:

  1. अधूरे स्वप्न भी पूर्णता चाहते हैं।

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  2. ये अधूरे ख़्वाब और उनसे बने मोती - क्या कहूँ ,बस खामोशी से निहार रही हूँ .....

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  3. यही सपने एक दिन उजाला बनेंगे..

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  4. बेहतरीन भाव ... बहुत सुंदर रचना....

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