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सोमवार, 23 सितंबर 2013

मेरा इश्क..........



मेरा इश्क मेरा जुनून है....नहीं तुझसे कोई गिला किया...
मेरे नाम से तू उबर गया...नहीं मुझसे फिर तू मिला किया 

मेरी चाहतें....मेरी नेमतें....मेरे अधखुले कई ख्वाब हैं...
जो कुबूल हो भी तुझे कभी....मेरे आंसुओं ने गिला किया 

वो जो मेहरबां था कभी मेरा....नहीं राजदां है वो अब मेरा 
कभी दिल गवां के भी हंस दिए....कभी दिल से दिल का सिला दिया

मेरा दिल कभी तेरे नाम था...मेरे दिल में तू सरेआम था... 
रही अब तलब न मुझे तेरी...दिल-ए-गुल था...यूँ ही खिला किया 

मैं तेरे नसीब में थी कहाँ...तू मेरा नसीब भी न रहा...
जो बनी दुआ तो सिमट गयी...तन्हाई को भी जिला दिया 

मैं थी एक शम्मा जो बज़्म में...नहीं दे सकी तुझे रौशनी
मेरा जिस्म जल के न मिट सका...तुझे खाक में तो मिला दिया 






11 टिप्‍पणियां:

  1. वाह । जो जलो तो सूरज और जो बुझो तो चाँद...

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  2. बहुत सुन्दर प्रस्तुति.. आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी पोस्ट हिंदी ब्लॉग समूह में सामिल की गयी और आप की इस प्रविष्टि की चर्चा कल - बुधवार - 25/09/2013 को
    अमर शहीद वीरांगना प्रीतिलता वादेदार की ८१ वीं पुण्यतिथि - हिंदी ब्लॉग समूह चर्चा-अंकः23 पर लिंक की गयी है , ताकि अधिक से अधिक लोग आपकी रचना पढ़ सकें . कृपया पधारें, सादर .... Darshan jangra

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  3. बहुत ही सुंदर नज्म

    यहाँ भी पधारें
    http://sanjaybhaskar.blogspot.in

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