Text selection Lock by Hindi Blog Tips

शुक्रवार, 6 फ़रवरी 2015

नया सा नूर जैसे छा रहा है....





नया सा नूर जैसे छा रहा है... 
अँधेरा दूर होता जा रहा है...!

कोई बैठ़ा पस-ए-चिलमन है गोया, 
हमारे दिल को जो धड़का रहा है...!

गुजारी हिज़्र में इक उम्र हमने...
करीब अब वक़्त हमको ला रहा है..!

बहुत शिद्दत से चाहा है उन्हें पर... 
न जाने दिल क्यूँ धोखा खा रहा है...!

हमारी बज़्म हो उनको मुबारक..
वो आये...उठ के कोई जा रहा है...!

नहीं हम प्यार करते हैं किसी से... 
तो 'पूनम' दिल क्यूँ उन पे आ रहा है..!


***पूनम***


5 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी इस प्रस्तुति का लिंक 07-01-2015 को चर्चा मंच पर चर्चा - 1882 में दिया जाएगा
    धन्यवाद

    उत्तर देंहटाएं
  2. धन्यवाद दिलबाग जी मुझे चर्चामंच पर शामिल करने के लिए

    उत्तर देंहटाएं