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मंगलवार, 8 जनवरी 2013

एक स्वेटर......






जब हम नहीं तैयार तो क्या कर सकेंगे वो
रुसवा करेंगे वो  हमें....बस ! ये करेंगे वो !

उनकी ज़बांदराजी  पे  न था शक  हमें कभी
अब तक किया यही है, तो क्या अब करेंगे वो !

चेहरे पे एक चेहरा उनका और है जनाब 
अपने ही अक्स से नज़र चुरा रहे हैं वो !

यूँ तो गीले शिकवे हमें भी उनसे  हैं  बहुत
गर खोल दी जुबां तो न खुद सह सकेंगें वो !

अब क्या कहें किसी से हम उनके विसाल-ए-यार
अपने शहर में थक गए....गए दूजे शहर में  वो !

उनकी  निगेहबानियाँ....कुछ मुझपे यूँ रहीं  
बदनाम हमें करेंगे तो  क्या खुश रहेंगे वो !

कहते हैं जुर्म करना और सहना भी है गुनाह
अपने - किये गुनाह पे अब  क्या  कहेंगे वो ??

खुद को समझते है वो पाक साफ़ आजतक 
खुद कितनी तोहमतें मुझपे लगाते रहे हैं वो !






14 टिप्‍पणियां:

  1. वाह .......भावनाओं के के धागे से बना यह स्वेटर बड़ा सुन्दर है ।

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  2. आपकी इस पोस्ट की चर्चा 10-01-2013 के चर्चा मंच पर है
    कृपया पधारें और अपने बहुमूल्य विचारों से अवगत करवाएं

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  3. बहुत सुंदर!
    इस स्वेटर की गर्माहट में पूरी सर्दी कट जाएगी आपकी :)
    ~सादर!!!

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  4. सुनहरे एहसास लिए ... भावपूर्ण रचना ...

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  5. भावनाओं के रंगों से बना स्वेटर कितना गर्म होगा समझा जा सकता है और उसकी गरमाहट महसूस भी की जा सकती है |
    उम्दा रचना |
    आशा

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  6. कभी समय काटने का साधन हुआ करता था स्वेटर बुनना ...अब अहसास ही बाकि है
    यादों के और बातों के ..

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  7. बहुत खूब...
    बहुत ही सुन्दर....
    :-)

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  8. कितने विचारों की गुत्थियाँ बुनती गयीं स्वेटरों के फन्दों में।

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  9. खूबसूरत एहसास रंगों और विचारों का ..
    बहुत बढ़िया कारीगरी पूनम जी ....

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  10. नये प्रतीकों से रचित भावपूर्ण रचना आभार ......

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