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बुधवार, 12 दिसंबर 2012

जीना......







जिंदगी के कुछ क़र्ज़....
उतरते ही नहीं कभी-कभी...!
कितने सपने बेचे....
कितने दर्द लिए...! 
कुछ जाने...
कुछ अनजाने....
एहसास भी कम किये....! 
कुछ सुकूं तो मिला.. 
जीने के लिए....!
लेकिन जीने के लिए 
अपना होना ज़रूरी है.....! 
बस वही बच गया है अब.....! 
हाँ......
मैं अब खुश हूँ......!!





10 टिप्‍पणियां:

  1. अच्छी रचना...
    हालांकि भाव समझने में ज़रा डगमगा गए हम...
    सस्नेह
    अनु

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  2. अपना होना ज़रूरी है.....!
    बस वही बच गया है अब.....!
    संभालना ....
    ~~~~~~~~~~~

    हाँ......
    मैं अब खुश हूँ......!!
    किसी की नजर ना लगे !!

    उत्तर देंहटाएं

  3. जीने के लिए
    ख़ुद को ख़ुद का होना ज़रूरी है …
    सच है
    पूनम जी !

    खूबसूरत रचना !


    हमेशा ख़ुश रहिए … … …
    पूरे मन से शुभकामनाएं…

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  4. कोई भ्रम बना रहे ... जीना आसान हो जाता है

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  5. मुझे मालुम न था की आप भी ब्लॉग लिखती हो.... देखता हूँ ,एक दिन पूरा बैठकर पढूंगा .. ये नज़्म कुछ अपनी सी लगी .

    विजय

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