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बुधवार, 17 अक्तूबर 2012

उम्मीद.......






वादे भी कीजिये  ओ मुकर कर के देखिये 
जब बात न बने तो बदल कर के देखिये  !


माना  कि प्रेम पलता  नहीं  सबके  दिलों  में
फिर भी किसी को दिल में बसा कर के देखिये !

जब आएगा सैलाब तो सब बह ही जायेगा

धारा को अपनी ओर पलट कर के  देखिये !

इस दिल में रह रहा था जो अब तक उधार में

उस  को  ही  खरीदार  बना  कर  के  देखिये !

जो ख्वाब तेरे टूट गए.....फिर  न  जुड़ेंगे....
कुछेक  नए  ख्वाब संजो कर तो  देखिये...!

जन्नत कहीं नहीं है...वो दिल में ही पल रही

कुछ हंसिये खुद भी और हंसा कर के देखिये !

मिलने की अब उम्मीद न करिये रकीब से 

आँखों  में  उसका  नूर बसा  कर के देखिये...!





10 टिप्‍पणियां:

  1. वाह पूनम जी...
    नए ख्वाब संजोये जाएँ......टूटे फिर जुड़ते नहीं...

    सुन्दर!!!

    सस्नेह
    अनु

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  2. फिर भी किसी को दिल में बसा कर के देखिये ....क्या बात है ..बहुत खूब

    उत्तर देंहटाएं