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शुक्रवार, 10 जुलाई 2015

मुहब्बत दिल में रखती हूँ मैं नफरत भूल जाती हूँ.....






हर इक शिकवा, गिला, सारी रक़ाबत भूल जाती हूँ
मुहब्बत दिल में रखती हूँ मैं नफरत भूल जाती हूँ !

न छेड़ो इस तरह मुझको कि बह निकलें मेरे आँसू
दुखाये दिल कोई सारी नफासत भूल जाती हूँ !

किसी की नम हुई आँखें कोई नज़रें चुराता है
मिले गर प्यार से कोई हिमाकत भूल जाती हूँ !

नज़र से जब मिलें नज़रें नज़र झुक जाती हैं मेरी
रहे धोखा नजर में गर मुहब्बत भूल जाती हूँ !

मेरी शुहरत से जल कोई मुझे बदनाम करता है
बनाये लाख बातें फिर शराफत भूल जाती हूँ !

मुझे वो प्यार करता है नहीं इकरार करता है
मगर जब सामने हो वो शिकायत भूल जाती हूँ !

 तकाजे दोस्ती के कब अदा उसने किए 'पूनम'
मगर हँस के मिले वो जब अदावत भूल जाती हूँ !


***पूनम***




6 टिप्‍पणियां:

  1. ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन, दरोगा, जज से बड़ा - ब्लॉग बुलेटिन , मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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    1. धन्यवाद आप सभी का मुझे शामिल करने के लिए बुलेटिन में...

      हटाएं
  2. प्रेम में ऐसा ही होता है --- मन का अनकहा सच व्यक्त करती बेहद उम्दा गजल
    बहुत सुंदर
    बधाई

    आग्रह है मेरे ब्लॉग में सम्मलित हों -- ख़ास-मुलाक़ात

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  3. प्यार का तकाजा है प्यार से रहना .. बस प्यार ही प्यार ..
    जहाँ प्यार नहीं वहां Tit for tat
    बहुत सुन्दर

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