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शुक्रवार, 21 अक्तूबर 2011

ज़िंदगी न मिलेगी दोबारा.....



ज़िंदगी न मिलेगी दोबारा.....

खुदा की नेमतें हैं ये, इबादत की तरह लो तुम..
न रोको तुम इसे, ये जिन्दगी भरपूर जी लो तुम !

गयी गर जिन्दगी तो ये,  पलट कर फिर न आयेगी..
अभी जी लो,यहीं जी लो, इसे बाँहों में ले लो तुम !

तुम्हारी जिन्दगी मोहताज कब से हो गयी जानां..?
तुम्हारी थी तुम्हारी है, ये कब तुमने था पहचाना..??

न होना अब कभी नासाज़ अपनी रूह से जानां..!!
ज़रुरत जब लगे मेरी, हमारे पास आ जाना...!!

जलाएंगे शमा उम्मीद की मिल कर के हम दोनों..
जो  थे दुश्मन,रहें दुश्मन ! फिकर क्यूँ कर करें दोनों !!

हमारी जिन्दगी पर शौक से तोहमत लगा लें  वो !
खुदा बक्शे उन्हें किस्मत ! गिरेबाँ अपने झांकें वो !!




13 टिप्‍पणियां:

  1. वाह! बहुत ही लाजबाब प्रस्तुति है आपकी.
    आपकी सुन्दर प्रस्तुति ने मन मोह लिया है.
    आभार.

    मेरी नई पोस्ट पर आपका हार्दिक स्वागत है.
    'नाम जप' के विषय में अपने विचार व अनुभव
    प्रस्तुत करके अनुग्रहित कीजियेगा.

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  2. अभी जी लो यहीं जी लो इसे बाँहों में लेलो तुम ...मेरी जिंदगी को बदल देने वाली यही सोंच है
    जिसने भी इसे आजमाया उसका जीवन खिल गया
    बहुत सुंदर रचना पूनम जी !!

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  3. सुभानाल्लाह..........हर शेर उम्दा और मुक़म्मल .........दाद कबूल करें..........खूबसूरत ग़ज़ल |

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  4. बहुत ही खूब.
    अंतिम शेर तो बहुत ही बढ़िया है.
    दिल से निकली हुई रचना.

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  5. दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएँ!
    कल 24/10/2011 को आपकी कोई पोस्ट!
    नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद

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  6. thanx yashvant...
    aapke aabharee hain ham ki aap niyamit roop se meri rachnaaon ko padhte hain aur use nai purani halchal avm charcha manch mein sammilit bhi karte hain.....ek baar fir shukriya !!

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  7. ख्याल अच्छे लेकिन बहर की तासीर से महरूम शायरी

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