
ये आसमानी रास्ते कुछ ऐसे खो गए हैं,
हम बादलों के साथ-साथ गुम से हो गए हैं !!
चलते थे साथ तेरे जब हमसफ़र ,ओ मेरे !
इन राहों पे चलके कहीं हम तुम खो गए हैं !!
ये जिंदगी की राह भी कुछ इस तरह से गुम है,
न तुम ही वो रहे अब, हम भी न वो रहे हैं !!
क्यूँ कर छुपाई तूने यूँ हकीकत जिंदगी की ,
अब लाख दे हवाला फिर भी न ख़म गए हैं. !!




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