लोग न जाने क्यूँ
हर व्यक्ति,
हर संबंध को....
अपनी तरह से
खुद ही लेने लगते हैं...
किसी भी शख्स को
उसी की तरह
रहने ही नहीं देते हैं !
वो अपने ख्वाबों में
हर इंसान की
अपनी ही तरह सोची हुई
एक अजीब सी ...
एक मनचाही सी
तस्वीर बना लेते हैं खुद ही...
और फिर जीने लगते हैं
उसी तस्वीर के साथ !
कभी एक तस्वीर
उनके दुख में
उनके आँसू पोंछती है
चुपके से.......
और कभी दूसरी तस्वीर
उनकी खुशी में
उनके साथ खिलखिलाती है !
कभी कोई और ही तस्वीर
उनके अहं को भी
चुपके से बढ़ावा दे जाती है
और कभी कोई दूसरी तस्वीर
उनसे ही प्यार का इज़हार
कर जाती है चोरी से....
एक अजीब सिहरन सी
दे जाती है चुपके-चुपके !
और कभी-कभी
कोई तस्वीर आ कर
अपनी गोद में लिटा कर
थपकियाँ भी दे जाती है...
अकेली सुनसान रातों में ,
वही sleeping pills सा
काम भी कर जाती है !
अरे हाँ !!
मैंने आपसे तो पूछा ही नहीं.......
आपके पास इनमें से
कौन सी तस्वीर है .......??
***पूनम***





