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गुरुवार, 5 मार्च 2015

होली.....हो ली......







लगा है रंग चेहरे पर, कि हर चेहरा संवर जाए...
सभी सूरत में अब मुझको, मेरा ईश्वर नज़र आए..!
अजब है रंग होली का, मेरे हमदम न पूछो तुम...
ये दिल करता है बस अब तो, जमाना यूँ ठहर जाए...!!


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गुलाबी गाल होली में, शराबी चाल होली में..
सभी पागल हुए हैं यूँ, बुरा है हाल होली में..!
नहीं कोई यहाँ भोला, सभी शातिर खिलाड़ी हैं..
चलेंगे दाँव ऐसा के, मचे भूचाल होली में..!!


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आज सजा है मंच चलो मिल खेलें होली...
खूब पियेंगे भंग चलो मिल खेलें होली....!!
नैनों के है बाण और शब्दों की गोली...

अजब सभी के ढंग चलो मिल खेलें होली...!!



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शब्दों के हैं बाण औ, अँखियाँ बनी कटार...
रंगों की बौछार है, मार सके तो मार....!!





  • ***पूनम ***
  • ०५/०३/२०१५



शुक्रवार, 27 फ़रवरी 2015

***पसंद अपनी अपनी***



कभी इज़हार करता है कभी इनकार करता है..
अजब मेरा सनम ये गलतियाँ सौ बार करता है..!

ये दिल यूँ रूठ बैठा है न जाने क्या कहा उसने...
फ़िक़र मेरी नहीं अब वो हुज़ूरे यार करता है...!

मुहब्बत कातिलाना है,वफ़ा उसकी, जफ़ा उसकी...
सितम पर बस सितम ढाये यही दिलदार करता है...!

कोई खामोश रहता है सुहानी रात में भी यूँ...
वही हो यार अपना जो निगाहें चार करता है..!

हमारे दिल में रहता है वो अब तक मुफ़्त में 'पूनम'..
यही उसका किराया है वो हमसे प्यार करता है...!


गुरुवार, 12 फ़रवरी 2015

दाँव......



मेरे सामने आते ही
तुम्हारे चेहरे की
सारी परतें उतरने लगती हैं
तुम्हारा झूठ
तुम्हारे ही ठहाकों के साथ
उतने ही जोर से 
बोलने लगता है
तुम्हारे जोर से कहे हुए
हर शब्द के पीछे से
तुम्हारे आँखों में छुपी
ग्लानि चीखने लगती है
लोगों को भले ही
तुम कुछ भी बताओ
लेकिन मेरे सामने 
तुम्हारी जुबां से निकले 
हर शब्द निरर्थक हो जाते हैं...!
जानते हो क्यूँ...??
क्यूँकि...
तुमने अपने जीवन में
शरीर और मन की
सत्यता और पवित्रता...
दोनों को दाँव पर लगा दिया है...!!

***पूनम***


शुक्रवार, 6 फ़रवरी 2015

नया सा नूर जैसे छा रहा है....





नया सा नूर जैसे छा रहा है... 
अँधेरा दूर होता जा रहा है...!

कोई बैठ़ा पस-ए-चिलमन है गोया, 
हमारे दिल को जो धड़का रहा है...!

गुजारी हिज़्र में इक उम्र हमने...
करीब अब वक़्त हमको ला रहा है..!

बहुत शिद्दत से चाहा है उन्हें पर... 
न जाने दिल क्यूँ धोखा खा रहा है...!

हमारी बज़्म हो उनको मुबारक..
वो आये...उठ के कोई जा रहा है...!

नहीं हम प्यार करते हैं किसी से... 
तो 'पूनम' दिल क्यूँ उन पे आ रहा है..!


***पूनम***


सोमवार, 19 जनवरी 2015

इश्क़ की रस्म....





शाम कुछ इस तरह से आई है
ज़िन्दगी जैसे गुनगुनाई है ...!

तीरगी दूर छुप के बैठ गई...

रात दुल्हन सी झिलमिलाई है...!

साथ वो अब मेरे नहीं आता...

उसकी यादों से आशनाई है...!

वो मुझे याद कर परीशां हो...

इश्क़ की रस्म यूँ निभायी है...!

रात 'पूनम' की जब हुई रौशन...

चाँदनी हुस्न में नहाई है...!



19/01/2015

उदयपुर


सोमवार, 24 नवंबर 2014

मुखौटे........




जहाँ आस्था है..
वहाँ विश्वास है...!
जहाँ प्रेम है.. 
वहां समर्पण है...!
और जहाँ सादगी है..
वहाँ ये सब  एकसाथ हैं...!
असल में हमने 
अपना स्वाभाविक रूप ही
खो दिया है कहीं...!
सादगी न जाने 
कितनी परतों में
छुप गयी है...!!
हर चेहरे पर न जाने कितने
मुखौटे चढ़े हुए हैं कि...
सादगी को अपना चेहरा
आजकल खोजे नहीं मिल रहा है...!!
देखिये तो....
आपके पास कितने मुखौटे हैं...??


धर्मशाला से.....
18/11/2014


रविवार, 16 नवंबर 2014

अपना रास्ता...





किसी भी भाषा में बात करो
उदासी रोशन करने के लिए
शब्दों के दिए की...
ज़रूरत नहीं होती...!

सपनों का अस्तित्व है..
वो किसी तरह भी नहीं छुपते..!

माथे पर बेचैनी की लकीरें
अपाठ्य हों फिर भी
सब तो नहीं...
हाँ...
हर काल में कुछ लोगों के लिए
पठनीय हो ही जाती हैं...!

नदियाँ पगडंडियों के साथ ही बहती हैं...
राजमार्गों के साथ नहीं..
इसलिए नदी के किनारे की जमीन
बंजर हो ही नहीं सकती...! :)
हाँ...
जिद की फसल उपजेगी या नहीं..
ये तो विधाता जानता है..
या फिर...
फसल बोने वाला...!!

कोई भी रास्ता हो...
खुद तक पहुँचना बहुत आसान होता है..!
खुद की कोई सरहद नहीं..
न पगडंडी...
न राजमार्ग...
न नदी...
न पेड़....!
कोई रास्ता नहीं...
कोई संकेत नहीं...!
अपनी अव्यक्त दुनिया की अभिव्यक्ति...
क्या तुम स्वयं नहीं...!!

***पूनम***
On my way to Dharmshala...
16/11/2014