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शुक्रवार, 22 फ़रवरी 2013

यादें........






मेरे पास है
यादों का एक कमरा.....
जिसमें बंद हैं
कुछ एहसास..
अनजाने..
अनकहे...
अनमने..
अनछुए...!
कुछ खुशियाँ हैं...
तुम्हारी...
मेरी...
कुछ हमारी...!
कुछ गम भी हैं...
तेरे...
मेरे...
कुछ अपने...!
और हैं कुछ 
उदासियाँ भी.....
लेकिन यहाँ मैं हूँ......
सिर्फ और सिर्फ मैं.....!!
यहाँ तुम 
दूर दूर तक
नज़र नहीं आते...!!


गुरुवार, 14 फ़रवरी 2013

मुहब्बत जब किसी से की जाये...








एक मुहब्बत की थी मैंने...
एक मुहब्बत करती हूँ.....
एक मुहब्बत तुम थे...मैं थी...
एक मुहब्बत.......बस मैं हूँ !
तुमको पा कर पाया सब कुछ
सब कुछ पा कर खोया है 
तेरी मुहब्बत तू ही जाने
पाक मुहब्बत में....मैं हूँ !
तेरी दुनिया तू था...तू है
मेरी दुनिया थी तुझमें....
आज मेरी दुनिया है मुझमें 
आज मेरी दुनिया मैं हूँ........!!




रविवार, 10 फ़रवरी 2013

बसंत.......





                                    दूर गगन तक फैल गयी है तरुनाई...
                             झूम झूम के घूंघट खोले पुरवाई ,
                             फूल फूल पे भौंरें डोलें...मुख चूमें...
                             कली कली अनजानी खुद ही शरमाई ,
                             पीली सरसों ने सुगंध बिखरा दी अपनी...
                             गाने लगी हवा.....लो फिर बसंत आई...!!






मंगलवार, 5 फ़रवरी 2013

कर्ज़........





तमाम लोग है दीदार को तरसे मेरे...
और होंगे तेरे दीदार पे मरने वाले.....!

हमारे बाद ज़माने में ये चरचे र्होंगे..
एक हम ही थे यहाँ प्यार निभाने वाले.....!

हमने सोचा न था वो हमको भूल जायेगा...
एक हम ही थे उसे दिल से लगाने वाले....!

मैं किस तरह से शुक्रिया दूँ अभी से तुझको  
न जाने  कितने  क़र्ज़ हैं उतारने वाले...!!

***पूनम***


रविवार, 20 जनवरी 2013

प्यार और चाँद...










मेरे बालों में मेरे उँगलियाँ घुमाते हुए...
तुम ने ठीक कहा था उस दिन---
प्यार चाँद सा होता है !
और मैं मान गयी थी सहजता से...! 
उसके मायने नहीं समझ पाई थी उस दिन....!
चाँद में प्यार की चमक के अलावा 
कुछ देख ही न पाई थी तब...
शायद वो उम्र ही नहीं थी जोड़-घटाव की...!
आज और अब..
कुछ  कुछ समझ आने लगा है 
तुम्हारी बातों का मतलब...
और उनका भाव भी...!
मुझ जैसी नासमझ को भी 
आख़िरकार समझदार बना ही दिया तुमने...!!
तुम्हारी ही बातों की 
न जाने कितनी गांठें खुलने लगी हैं अब...
अब जाना है सही अर्थ चाँद का...!
प्यार के सन्दर्भ में चाँद...
जब भी बढ़ता है तो 
पूर्णिमा सा उजागर होता है...
और जो घटने पे आ जाये तो....
अमावस से भी ज्यादा अँधेरा....!






मंगलवार, 8 जनवरी 2013

एक स्वेटर......






जब हम नहीं तैयार तो क्या कर सकेंगे वो
रुसवा करेंगे वो  हमें....बस ! ये करेंगे वो !

उनकी ज़बांदराजी  पे  न था शक  हमें कभी
अब तक किया यही है, तो क्या अब करेंगे वो !

चेहरे पे एक चेहरा उनका और है जनाब 
अपने ही अक्स से नज़र चुरा रहे हैं वो !

यूँ तो गीले शिकवे हमें भी उनसे  हैं  बहुत
गर खोल दी जुबां तो न खुद सह सकेंगें वो !

अब क्या कहें किसी से हम उनके विसाल-ए-यार
अपने शहर में थक गए....गए दूजे शहर में  वो !

उनकी  निगेहबानियाँ....कुछ मुझपे यूँ रहीं  
बदनाम हमें करेंगे तो  क्या खुश रहेंगे वो !

कहते हैं जुर्म करना और सहना भी है गुनाह
अपने - किये गुनाह पे अब  क्या  कहेंगे वो ??

खुद को समझते है वो पाक साफ़ आजतक 
खुद कितनी तोहमतें मुझपे लगाते रहे हैं वो !






रविवार, 6 जनवरी 2013

इश्क....प्रेम....प्यार....



















इश्क....
प्रेम......
प्यार......

क्या समानता है इन तीनों में...???

तीनों में ही ढाई अक्षर हैं.....
पूरे-पूरे तीन  भी  नहीं...! 

दूसरे से हो रहे...
तो तीनों ही अधूरे हैं.....
और खुदा से हो जाये तो...
तीनों ही पूरे हैं....!!